Saturday, February 09, 2013

गुरु गीत !

कलम उठा गंदे हाथो में
ज्ञान मूर्ति, कहलाते   हैं !
तामस मन के मालिक पर 
ये नाम व्यास बतलाते हैं !
शारद को अपमानित करते, लिखते बड़े रंगीले गीत !
देख के इन कवियों की भाषा, आँख चुराएं मेरे गीत  !

धवल वस्त्र मंत्रोच्चारण 
से कैसा सुन्दर नूर रहे !
टीवी से हर घर में आये
इन संतों से , दूर रहें !
रात्रि जागरण में बैठे हैं ,लक्ष्मीपूजा करते गीत !
श्रद्धा के व्यापारी गाते,तन्मय हो जहरीले गीत !

कष्टनिवारक से लगते हैं,
वस्त्र पहन, सन्यासी के !

रामनाम को बेंचें खुलकर
बुरे करम, अधिवासी के !
मन में लालच ,नज़र में धोखा, मुंह से बोलें मीठे गीत !
श्रद्धा बेंचें,घर घर जाकर,रात में मस्त निशाचर गीत !

शिक्षण की शिक्षा लेते हैं ,
गुरुशिष्टता मर्म न जाने !
शिष्यों से रिश्ता बदला है 
जीवन के सुख को पहचाने
आरुणि ठिठुर ठिठुर मर जाएँ,आश्रम में धन लाएं खींच !
आज  कहाँ  से  ढूँढें  ऋषिवर , बड़े  दुखी   हैं, मेरे  गीत !

कोई तो, आएगा ऐसा !
राह दिखाए बंजारे को !
जाने कबसे रहा भटकता 
कबसे ढूँढू अनजाने को !
नंगे पैरों, गुरु-दर्शन को , आये थे, मन में ले प्रीत !
सच्चा गुरु ही राह दिखाए , खूब जानते मेरे गीत !


काव्य समीक्षा हेतु खड़े 
आचार्य गुरु दरवाजे पर 
उपाध्याय के पाँव न देखे 
क्या  जाऊं , दरवाजे पर 
सत्यवाक घृतिमान सामने,हतप्रभ होते मेरे गीत !
सरस्वती का वंदन करते , अर्पित होते मेरे गीत ! 



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