Friday, February 08, 2013

पुत्री वन्दना - सतीश सक्सेना

क्यों तुम चिंतित से लगते 
हो, बेटी जीत दिलाएगी  !  
विदुषी पुत्री जिस घर जाए
खुशिया उस घर आएँगी !
कर्मठ बेटी के होने से , 
बड़े आत्म विश्वासी गीत !
इसके पीछे चलते चलते,जग सीखेगा,जीना मीत !

जब से बेटी गोद में आई 

घर में रौनक आयी  है  !
दोनों हाथों दान किया पर 
कमी , कभी न आई है !
लगता नारायणी गा रहीं,
अपने घर में आकर गीत !
उनके हाथ, बरसता वैभव, अक्षय  होते मेरे गीत  !

जब से इसने चलना सीखा, 

घर में खुशियाँ छायीं थी  !
इसके आने की आहट से 
चेहरे, रौनक आयी  थी !
स्नेही मन जहाँ रहेगी , 
खूब सहारा दें जगदीश !
अन्नपूर्णा दान करेगी , आशिष देते मेरे गीत ! 

सुबह सबेरे उठते इसके  

चहक उठे, मेरा घर बार !
इसके जाने से ही घर में
सूना सा लगता संसार !
जलतरंग सी जहाँ बजेगी,
मधुर सुधा बरसाए प्रीत !
बाबुल का सम्मान बढाए, करें प्रभावित मेरे गीत !


रोज कबूतर करके आएं 
अभिनंदन गुड़िया के घर का !
सारे घर को महका जाएँ , 
कुछ चन्दन उसकी यादों का !
चंचल, कल्याणी, मनभावन, 
जहाँ रहे बजता संगीत !
यादें इसकी जब जब आएं,आह्लादित हो जाते गीत !

अच्युतम  केशवम
पूज्य  नारायणम
ईश  पुरुषोत्तमम
कृष्ण  आवाहनम 
सिद्धिविनायक स्थापित कर,
विष्णुस्तवन गायें ईश !
सारे द्वार सुरक्षित उसके ,  निश्चित रहते,  मेरे गीत !


ॐ सर्व मंगल मांगल्ये 
शिवे, सर्वार्थ साधिके !
शरण्ये त्रयम्बके  गौरि
नारायणी नमोस्तु  ते !
दोनों कर श्रद्धा से जोड़े, 
पुत्रि वन्दना करते गीत !
बेटी गरिमामयी  रहेगी, आशीर्वाद  भेजते  गीत !
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